Belpatra
800 साल पुराना गौरी शंकर मंदिर चांदनी चौक मेंमुख्य पुरानी दिल्ली सड़क पर दिगंबर जैन लाल मंदिर के पास स्थित एक हिंदू मंदिर है। गौरी शंकर मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैऔर शैव धर्मके सबसेमहत्वपूर्णमंदिरों मेंसे एक है। मंदिर मेंएक 800 साल पुराना भूरेरंग का लिंगम (शिश्न शिला) है जो संगमरमर सेबनी स्त्री अंग की प्रतिमा में स्थापित है। लिंगम चांदी सेबनेसर्पों सेघिरा हुआ हैऔर ब्रह्मांडीय स्तंभ, ब्रह्मांड या जीवन के केंद्र का प्रतीक है।
₹500 तक के प्रसाद/भोग केवल मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
₹501 या उससे अधिक के प्रसाद को भगवान को भोग लगाने के पश्चात भक्त के पते पर भेजा जाता है।
इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण अपा गंगा धर नामक एक मराठा सैनिक नेकरवाया था, जो भगवान शिव के भक्त थे। एक बार युद्ध मेंवेबुरी तरह घायल हो गए थेऔर उनके बचनेकी उम्मीद बहुत कम थी। इसलिए उन्होंने भगवान शिव सेजीवनदान मांगा और वादा किया कि यदि वेबच गए तो एक सुंदर मंदिर का निर्माण करवाएंगे। तमाम मुश्किलों के बावजूद वेबच गए और उन्होंनेमंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर के मुख्य द्वार के पास एक नुकीली
पिरामिडनुमा छत जैसी संरचना के निचलेहिस्सेपर उनका नाम हिंदी मेंअंकित है। 1959 में सेठ जयपुरा नेमंदिर का जीर्णोद्धार किया और अब उनका नाम मंदिर की खिड़कियों पर अंकित है। मंदिर के अंदर भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती (गौरी-शंकर) तथा उनके दो पुत्रों गणेश और कार्तिक की मूर्तियां विराजमान हैं। असली सोनेके आभूषणों सेसजी भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियां शिवलिंग के ठीक पीछेचांदी के चंदवा के नीचेस्थित हैं।
शिवलिंग के ऊपर चांदी का एक जलपात्र भी हैजिससेलगातार जल की बूंदेंगिरती रहती हैं।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ानेसेमनुष्य के सभी जन्मों के पाप नष्ट होतेहैं, मानसिक शांति मिलती है, और रुके हुए कार्य पूरेहोतेहैं। धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण सेइसके कई महत्वपूर्णफायदेहैं।
1. आध्यात्मिक ए वंधार्मिक लाभ
• त्रिदेव का वास: बेलपत्र की तीन पत्तियों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का स्वरूप माना जाता है। मान्यता हैकि इसे अर्पित करनेसेत्रिदेव की कृपा एक साथ प्राप्त होती है
• दोष और पापों का शमन: शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक बेलपत्र चढ़ानेसेकरोड़ों रुद्राभिषेक के समान पुण्य प्राप्त होता हैऔर दुर्भाग्य दूर होता है
• शिव को प्रिय: बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। गर्मी और विष के प्रभाव को शांत करनेके लिए शिव पूजा में इसका विशेष स्थान है
2. आयुर्वेदिक ए वंस्वास्थ्य लाभ
• आयुर्वेदिक महत्व: बेल के पेड़ (Bael tree) के हर हिस्सेमेंऔषधीय गुण होतेहैं। बेलपत्र वात, पित्त और कफ को संतुलित क रनेमेंअत्यंत कारगर है
• पेट और पाचन के लिए: इसके पत्तों के रस का सेवन पेट की बीमारियों, एसिडिटी और कब्ज मेंराहत दिलाता है
• त्वचा और रक्तचाप: बेलपत्र मेंएंटीबैक्टीरियल गुण होतेहैं। आयुर्वेद मेंइसके इस्तेमाल सेब्लड शुगर को नियंत्रित करने और त्वचा की समस्याओंको ठीक करनेमेंमदद मिलती है
बेलपत्र चढ़ानेका सही तरीका
शिवलिंग पर हमेशा बेलपत्र चिकनी सतह (front side) की तरफ सेअर्पित करें。 पत्तियाँकटी-फटी या खंडित नहीं
होनी चाहिए और डंठल (डण्डी) आपकी तरफ होना चाहिए。 इसे’ॐ नमः शिवाय’ मंत्र के साथ चढ़ाना सबसेउत्तम
माना जाता है





